Friday, 25 November 2011

Haseen Sapna

एक कन्या कुवारी थी
वो तो लाखो पे भारी थी

हर दिल को अजीज़ थी
हर घर की दुलारी थी

उसकी चाल मतवाली थी
मेरे मित्र की वो साली थी

एक कन्या कुवारी थी

मिलवाया मुझे जिसने
वोह उसकी मामी थी

बाते हुई उससे
पर देती वो गाली थी

एक कन्या कुवारी थी

चेहरा ख़ूबसूरत था
और कानो में बाली थी

पहनी हुई उसने
वो ज़री वाली साडी थी

आखों में था कजरा
और होटों पे लाली थी

एक कन्या कुवारी थी

हर लड़के ने देख उसे
अपनी सासें थामी थी

एक बिजली गिरी जैसे
जब एक कन्या उसे..............मम्मी पुकारी थी

अब वो ना कन्या कुवारी थी
फिर भी मेरी आँखों में खुमारी थी

हुआ कुछ जादू था
और छाई बेकरारी थी

हडबडाकर जागा मै
और रह गयी अधूरी वो कहानी थी


वैभव मैत्रेय


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