Wednesday, 23 November 2011

Haal is desh ka

पुछा जो किसीने आज, हमें बतलाओ राज़
हाल क्या है समझाओ, हमें इस देश का

दिया जो जवाब मैंने, सहने पड़ेगे ताने
होगा शर्मिंदा हर नागरिक मेरे देश का

बोला वो अनजान मित्र, क्या है लोगो का चरित्र
थोडा बतलाओ मुझे, नागरिक हूँ मै भी इसी देश का

देश ने है की तर्राकि, नौकरी भी हुई पक्की
पास जिसके है पैसा, डोर थामे है वही इस देश का

पैसे की भी देखो माया, बेच रहे है लोग काया
अश्लीलता परोस रहा मीडिया इस देश का

गाड़ियां की भीड़ देखि, पैदल वाले की अनदेखी
लेटा ओढ़े सफ़ेद चादर आम आदमी इस देश का

नेताजी के कुरते की, ज़ेबें विचित्र देखि
फ़ैल हो गया है हर लोक्कर रिज़र्व बैंक का

नेता, अभिनेता सब मांगे जनता से भीख
नोट और वोट बनाते भविष्य इस देश का

रिश्तों का भी मोल भाव, कहीं धुप कहीं छाँव
कर रहा है माँ का भी सौदा, बेटा इस देश का

इमारतों की परिभाषा, चाँद छूने की भी आशा
रौंद रहा झोंपड़ियों को, समाज इस देश का

घर बनगया है फ्लैट, चाहिए सभी को हैट
पहना रहा है टोपियाँ, हर सक्षम इस देश का

बातें जो हुई मोबाइल, ना देख सकोगे तुम स्माइल
फैसबुक बना है जबसे प्रियतम इस देश का

सुन के ये सारी बातें, सुनी हो गयी हैं रातें
करवटों में खोज रहा बैचैन मनुष्य इस देश का

मै था अनजान अच्छा, फिर बन जाऊ बच्चा
परीपक्व होगया है बच्चा भी इस देश का



















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