Monday, 19 December 2011

खवाइश

खवाइश क्या है आज क्या बतलाए तुमको हम
के हमने दुआ यही मांगी की मिट जाये तेरे सारे गम

तेरी मजबूरी को देख आज मै हैरान कितना हूँ
की तुझसे दूर होकर भी, मै तेरे पास कितना हूँ

तुम हर बार देती हो मेरे दिल पे  क्यों दस्तक
तेरी साँसे कर देती हैं मेरी धड़कने मधम

खवाइश क्या है आज क्या बतलाए तुमको हम

तेरे आँखों से पीकर आज हुए कुछ मदहोश हम
दिल चाहता है बस आना तेरी आगोश में सनम
एक प्यास थी अनजान सी, जो नहीं है आज तक बूझी
कहा जाता भला मै खोजने इस हाल में सनम


एक आंसू भी ना गिर पाया आज, इस सर्दी के आलम में
दो घूंट भी ना पी पाया मै, इस बर्फीले मौसम में
तेरे होने का हर वक़्त रहा कुछ एहसास इस कदर
सुबह जागा, थे होट सूखे और आँखे भी थी कुछ नम


खवाइश क्या है आज क्या बतलाए तुमको हम

वैभव मैत्रेय

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