Wednesday, 21 December 2011

फनाह

बहुत कम ऐसे लम्हे होते हैं जो यादगार बन जाते हैं ! और उनमें भी चंद पल ऐसे होते हैं जो याद आने पर आपकी आँखों में चमक और चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कराहट ले आये !

बात पंद्रह साल पहले की एक क्रिसमस पार्टी की है! अचानक अनू ने प्रोग्राम बनाया और गौरव और बरखा को चलने का आर्डर दे डाला ! अरे मै आप को बताना भूल गया, अनू गौरव की बॉस थी उस कंपनी में जहाँ वो अपने graduation के दिनों में शाम को पार्ट टाइम एक टेलेकाल्लिंग executive का काम किया करता था ! वो एक फ्री classified ad पेपर का ऑफिस था !

खैर, हम बात कर रहे थे उस क्रिसमस पार्टी की जो आज भी मुझे याद है ! अनू की invitation के बाद भी घर से permission मिलना बहुत ज़रूरी था ! गौरव ने घर पर बात की और उसकी उम्मीद के विपरीत उसे टाइम से लौटने की हिदायत के साथ permission मिल गयी, अब बारी थी बरखा की ! उसे भी इस शर्त पर जाने की अनुमति मिली की ऑफिस वालों से कहना की घर पर छोड़ कर जाए !

चूँकि पार्टी अनू की फ्रेंड की तरफ से सुंदर नगर में थी, थोड़ी ही देर में दो गाड़ियाँ सुन्दर नगर की तरफ दौड़ने लगी ! उस रात चारो तरफ सडकों पर धुंद ही धुंद छाई हुई थी  और ठण्ड भी काफी थी !  गौरव के ऑफिस से कुल ७ जने थे, बाकी सब पार्टी में अनजान लोग थे, लेकिन सब ने खूब डांस किया, एन्जॉय किया ! अचानक घडी की तरफ ध्यान गया और घडी में १२ बजे देख गौरव और बरखा के होश उड़ गए ! उन दिनों मोबाइल तो होता नहीं था जो घर में अपने लेट आने की information दे पाते! उन दोनों ने अनू से घर छुडवाने की request की और चलने को कहा ! एक - दो बार कहने पर अनू मान गयी ! लेकिन ये क्या हुआ, किसी ने एक गाडी के चारों tyres की हवा निकाल दी थी ! अब समस्या ये की इतने लोग एक जीप में कैसे adjust हों ! किसी तरह से सब adjust हुए और ये क्या बरखा को गौरव की गोदी में बैठना पड़ा! गौरव और बरखा अच्छे दोस्त थे और एक ही शिफ्ट में काम करते थे ! क्यूंकि बरखा को सबसे पहले घर छोड़ना था तो वो  गौरव की गोदी में बैठ गयी!

बरखा ने फर वाला coat पहना हुआ था, उसके coat से बड़ी भीनी भीनी खुसबू आ रही थी! उस सर्दी के मौसम में उसके शरीर की तपिश गौरव महसूस कर रहा था, उसका फर coat और वो perfume उसे कुछ मदहोश सा कर रहे थे! एक क्षण के लिए गौरव ने बरखा की मौन स्वीकृति महसूस की! वो कपड़ों के बीच गर्मी का एहसास दोनों के लिए ही नया था और शायद इसी लिए वो आँखे बंद किये गौरव की  jacket में अपने को समेटती रही ! अचानक जीप रुकी, driver ने धीरे से कहा मैडम आपका घर आगया !

वो बड़े अनमने मन से जीप से उतर गयी, वो बेनाम रिश्ता वहीँ फनाह हो गया और एक याद छोड़ गया हमेशा के लिए !

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