Tuesday, 18 June 2013

एक आह

एक आह थी जो रूह से
दिल में उतर गयी
हमें फनाह करके
वो नज़रें किधर गयी

दिन रात खोजता रहा
मैं आप का पता
पाया तुम्हें सिर्फ ख्वाब में
जहाँ भी नज़र गयी

करना ये एहसान
उनके मिलने पे ए खुदा
चली जाए मेरी जान भी
जिस ओर वो गयी

"वैभव मैत्रेय"

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