कुछ यादों पे मेरी ज़िन्दगी टिकी रही
न उसे ही याद आया
न मैंने ही कोशिश की
हर आहट पे लगा वो आगये
न मंजिल उसे मिली
न मैंने ही कोशिश की
"वैभव मैत्रेय"
न उसे ही याद आया
न मैंने ही कोशिश की
हर आहट पे लगा वो आगये
न मंजिल उसे मिली
न मैंने ही कोशिश की
"वैभव मैत्रेय"
No comments:
Post a Comment