सोचा इतने दिनों बाद
मुलाकात तो होगी
कुछ मेरी तुम्हारी न सही
मगर बात तो होगी
लेकिन अभी खुदा को शायद
ये मंज़ूर नहीं
चलो अगर ऐसा है
तो ऐसा ही सही
ये दिल तुमसे मिलने की
चाह में धड़कने लगा था फिर से
तुम आओगे करीब सोच के
गुनगुनाने लगा था फिर से
और उस पर तेरे न आने का
जो पैगाम आ गया
दिल में उदासी और आँखों में
अँधेरा सा छा गया
"वैभव मैत्रेय"
मुलाकात तो होगी
कुछ मेरी तुम्हारी न सही
मगर बात तो होगी
लेकिन अभी खुदा को शायद
ये मंज़ूर नहीं
चलो अगर ऐसा है
तो ऐसा ही सही
ये दिल तुमसे मिलने की
चाह में धड़कने लगा था फिर से
तुम आओगे करीब सोच के
गुनगुनाने लगा था फिर से
और उस पर तेरे न आने का
जो पैगाम आ गया
दिल में उदासी और आँखों में
अँधेरा सा छा गया
"वैभव मैत्रेय"
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