मेरी साँसों में होती हो
मेरे ख्वाबों में आती हो
न दिखाया कभी
जिन जस्बातों को मैंने
जानेबहार तुम उन
एहसासों में होती हो
खो जाती हो जब
उजालों में कहीं तुम
अक्सर तब तुम
मेरी सर्द रातों में होती हो
पास आकर भी जब
तुम दूर होती हो
मुझसे जुदा होने का
दर्द भी सहती हो
ज़बां से कभी कुछ
न कहा तुमने
लेकिन हजारों किस्से
अपनी आँखों से कहती हो
"वैभव मैत्रेय"
मेरे ख्वाबों में आती हो
न दिखाया कभी
जिन जस्बातों को मैंने
जानेबहार तुम उन
एहसासों में होती हो
खो जाती हो जब
उजालों में कहीं तुम
अक्सर तब तुम
मेरी सर्द रातों में होती हो
पास आकर भी जब
तुम दूर होती हो
मुझसे जुदा होने का
दर्द भी सहती हो
ज़बां से कभी कुछ
न कहा तुमने
लेकिन हजारों किस्से
अपनी आँखों से कहती हो
"वैभव मैत्रेय"

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