ये जो कुछ काले बादल आज नज़र आये हैं
और कुछ नहीं सिर्फ ग़मगीन हवाएँ हैं
आप दरख़्त हैं
फलों से लदा हुआ जो गिर नहीं सकता
आपके साथ
मुझ जैसे हज़ारों की दुआएं हैं
हम सब तो कायल हैं आपकी हौसला बुलंदी के
ऐसे कितने पड़ाव आप पीछे छोड़ आये हैं
यक़ीनन फिर उसी तेज़ से रोशन होगा ये चिराग
अरे आपने तो नजाने कितने सूरज उगाये हैं
"वैभव मैत्रेय"
और कुछ नहीं सिर्फ ग़मगीन हवाएँ हैं
आप दरख़्त हैं
फलों से लदा हुआ जो गिर नहीं सकता
आपके साथ
मुझ जैसे हज़ारों की दुआएं हैं
हम सब तो कायल हैं आपकी हौसला बुलंदी के
ऐसे कितने पड़ाव आप पीछे छोड़ आये हैं
यक़ीनन फिर उसी तेज़ से रोशन होगा ये चिराग
अरे आपने तो नजाने कितने सूरज उगाये हैं
"वैभव मैत्रेय"
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