तेरी आवाज मुझे बनाती है क्यों दीवाना
मान कहना, न मचलना, थम जा
बन जाये न कहीं कोई अफसाना
ये जस्बा ए मोहोब्बत नजाने क्यों पैदा हुआ
मै हूँ गुम तुझमे, तुझसे न कभी अल्हैदा हुआ
माना मसरूफ न थे हम बंदगी में तेरी
माना मसरूफ न थे हम बंदगी में तेरी
चाहा बेपनाह, चाहा हर बार तुम हो जाओ मेरी
जलना चाहे है इस शमा पे ये परवाना
माना हर बार ये दूरी है तेरी मायूसी का सबब
मैंने भी सिर्फ दिया प्यार, तुमसे बदले में माँगा है कब
न छिपा चेहरे को अपने, नकाब हटा दे अब
कहीं ऐसा न हो, मै हो जाऊ रुक्सत दुनिया से तेरी
कहीं ऐसा न हो की तुम को पड़े कल पछताना
तेरी आवाज मुझे बनाती है क्यों दीवाना
तेरी आवाज मुझे बनाती है क्यों दीवाना
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