ये प्रकृति सुन्दर, अनमोल है
रहते है सब जीव जहाँ
वो धरती एकदम गोल है
हर और मनोहर दृश्य है
जहाँ रह रहा मनुष्य है
यहाँ बाग़ में कोयल गाती है
और नदिया संगीत सुनाती हैं
फसलें नाच दिखाती हैं
और रेत टीले बनाती हैं
इस मनोहर दृश्य का
बोलो क्या कोई मोल है
ये प्रकृति सुन्दर, अनमोल है
रहते है सब जीव जहाँ
वो धरती एकदम गोल है
तीन ऋतुओ का देखो खेल
ग्रीषम, शीत और बसंत का मेल
साल शुरू है ग्रीष्म से होता
बसंत है फिर प्रकृति को धोता
शीत में हर कोई चैन से सोता
यहाँ पक्षियों का जो शोर है
हर रात के बाद भोर है
इन सब का न कोई मोल है
ये प्रकृति बहुत अनमोल है
रहते है सब जीव जहाँ वो धरती एकदम गोल है
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