Wednesday, 14 March 2012

हाँ हमें मोहोबात है

आज कर दो मदहोश हमें, ना होश में तुम रहने दो
दिल में जो है सैलाब उठा, बिन बाँध के आज बहने दो

क्या ज़रुरत आज हमें अल्फाजों की
गीत की इस लैय को, दिल के साज़ पे बजने दो
एक बूँद गिरी तवे पर और भाप बन गयी
समेट कर इन बूंदों को, प्यार की माला पिरोने दो
आज कर दो मदहोश हमें, ना होश में तुम रहने दो

कांपते होट मेरे, शब्दों के आज मोहताज नहीं
एक मरमरी एहसास में, आज इनको भिगोने दो
तेरी आवाज़ ने बनाया जो बेजुबान हमें
अपनी साँसों में मेरे जज़्बात आज जुड़ने दो
आज कर दो मदहोश हमें, ना होश में तुम रहने दो

ना हो दीदार तेरा तो गम की कोई बात नहीं
मन की आँखों से ना देखा हो, ऐसी कोई रात नहीं
बेशक ना हो तुम रूबरू मेरे, ना हो ऐसे हालात सही
बेपनाह मोहोबात है तुमसे, आज फिर यही कहने दो
आज कर दो मदहोश हमें, ना होश में तुम रहने दो

वैभव मैत्रेय

1 comment:

  1. have u written this..??
    this is unbelievable...simply superb...
    wah wah wah wah....

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