Tuesday, 14 February 2012

हैप्पी वेलेंटाइन डे

बंद आँखों से हम अक्सर तेरा दीदार करते हैं
ये सच है मेरे हमदम की हम तुम से प्यार करते हैं

हर बात कैसे शब्दों में कही जाए हर बार
ख़ामोशी से ही सही हम ये इज़हार करते हैं
बंद आँखों से हम अक्सर तेरा दीदार करते हैं
ये सच है मेरे हमदम की हम तुम से प्यार करते हैं

ना चाहा कभी तेरी चाहत भी मिल जाए बदले में
तुम भी चाहते हो हमें, ये हम एतबार करते हैं

जब नहीं होती तुम पास मेरे, मै कितना तनहा होता हूँ
जब नहीं करती तुम बात मुझसे, मै कितना उदास होता हूँ
रात काटी हैं आँखों ही आँखों में यूँ तो कई बार मैंने
तुम भी जागी हो कितनी रातें, हम एहतराम करते हैं

बंद आँखों से हम अक्सर तेरा दीदार करते हैं
ये सच है मेरे हमदम की हम तुम से प्यार करते हैं

दूर हो कर भी कभी, कहीं कोई दूरी नहीं दिखती
जब से ख़रीदा है मुझे तुने, मेरी शख्सियत नहीं दिखती
टुकड़े टुकड़ों में शायद मै आज बिक भी जाऊं मेरे मौला
ये सच है लेकिन किसी बाज़ार में ये मोहोबत  नहीं बिकती

तुम्हे चाहा हैं मैंने जिस दीवानगी से ए हमदम  
नहीं होगी कभी ये कम, आज ये एलान करते हैं

मेरी मोहोबत नहीं मोहताज़ किसी भी दिन या मौके की
खुश्बू रहेगी यूँही जिंदा, ना ज़रूरत किसी हवा के झोंके की

ये रिश्ता नहीं ऐसा की हम समझाएं दुनिया को
ये ना जाने दौर है कैसा, क्यों अपने ठुकराया करते हैं

बंद आँखों से हम अक्सर तेरा दीदार करते हैं
ये सच है मेरे हमदम की हम तुम से प्यार करते हैं

वैभव मैत्रेय 


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