कभी वक़्त गुज़रा ख्याल में
अपनों को भी न खबर हुई
तुम दिल में ऐसे बसे रहे
पाया तुम्हें जहाँ भी नज़र गयी
हर बार तेरे आने से
मेरी ज़िन्दगी कुछ ओर सवंर गयी
कभी वक़्त गुज़रा ख्याल में
"वैभव मैत्रेय"
अपनों को भी न खबर हुई
तुम दिल में ऐसे बसे रहे
पाया तुम्हें जहाँ भी नज़र गयी
हर बार तेरे आने से
मेरी ज़िन्दगी कुछ ओर सवंर गयी
कभी वक़्त गुज़रा ख्याल में
"वैभव मैत्रेय"
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