नहीं सोये वो
नजाने कितनी रातों से
उलझे रहे
नजाने किन फ़िज़ूल बातों में
नहीं जानते थे वो
इस इंतज़ार का सबब
था ये सवाल एहेम
कि तुम मिलोगे कब
बदलना करवट तनहा
सर्द रातों में
नहीं सोये वो
नजाने कितनी रातों से
ऐसा नहीं की
मोहोब्बत हम नहीं करते
कसूर इतना कि
हम इज़हार नहीं करते
क्या बताएं कि
दिल के करीब आप कितना हैं
नहीं जानते फिर भी
क्यों अँधेरा इतना है
चलो मैं आज तुमको
एक दुनियाँ नयी दिखलाता हूँ
थाम लो हाथ ज़रा
तुम्हे तुमसे भी मिलवाता हूँ
आज ये भी जानलो सनम
ये जो गीत मैं गुनगुनाता हूँ
बेपनाह मोहोब्बत है तुमसे
खुदसे ज्यादा तुमको चाहता हूँ
आज नहीं दे सकता
जाने तुम्हे अपने हाथों से
चाहता हूँ बहलाना दिल
तेरा अपनी बातों से
न उलझोगे अब तुम
फ़िज़ूल बातों में
"वैभव मैत्रेय"
नजाने कितनी रातों से
उलझे रहे
नजाने किन फ़िज़ूल बातों में
नहीं जानते थे वो
इस इंतज़ार का सबब
था ये सवाल एहेम
कि तुम मिलोगे कब
बदलना करवट तनहा
सर्द रातों में
नहीं सोये वो
नजाने कितनी रातों से
ऐसा नहीं की
मोहोब्बत हम नहीं करते
कसूर इतना कि
हम इज़हार नहीं करते
क्या बताएं कि
दिल के करीब आप कितना हैं
नहीं जानते फिर भी
क्यों अँधेरा इतना है
चलो मैं आज तुमको
एक दुनियाँ नयी दिखलाता हूँ
थाम लो हाथ ज़रा
तुम्हे तुमसे भी मिलवाता हूँ
आज ये भी जानलो सनम
ये जो गीत मैं गुनगुनाता हूँ
बेपनाह मोहोब्बत है तुमसे
खुदसे ज्यादा तुमको चाहता हूँ
आज नहीं दे सकता
जाने तुम्हे अपने हाथों से
चाहता हूँ बहलाना दिल
तेरा अपनी बातों से
न उलझोगे अब तुम
फ़िज़ूल बातों में
"वैभव मैत्रेय"
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