रंजिशों से भी रिश्ते कायम होते हैं
नाराजगी के भी कुछ ऐसे आयाम होतें हैं
कि जब शब्दों का वजूद दरमियान नहीं होता
खामोशियों से इश्क के फरमान होतें है
लगाकर इलज़ाम हम पे, उसपर उल्फत का
वो सरेबाज़ार खुद नीलाम होते हैं
ये गफलत में करीब अपने, हमें बुला लेना
और नापाक हम हैं, उसपर ये इलज़ाम होतें हैं
मांगते हो जो दिल मेरा, ये बिकाऊ चीज नहीं जानिब
खुदा का पाक घर है ये, जहाँ भगवान् रहतें हैं
वैभव मैत्रेय
नाराजगी के भी कुछ ऐसे आयाम होतें हैं
कि जब शब्दों का वजूद दरमियान नहीं होता
खामोशियों से इश्क के फरमान होतें है
लगाकर इलज़ाम हम पे, उसपर उल्फत का
वो सरेबाज़ार खुद नीलाम होते हैं
ये गफलत में करीब अपने, हमें बुला लेना
और नापाक हम हैं, उसपर ये इलज़ाम होतें हैं
मांगते हो जो दिल मेरा, ये बिकाऊ चीज नहीं जानिब
खुदा का पाक घर है ये, जहाँ भगवान् रहतें हैं
वैभव मैत्रेय
bahut khoob...Wah Wah...Wah Wah
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