वक़्त है खंजरों को निकाला जाए
फिर किसी घाव को कुरेदा जाए
फिर एक खून का दरिया बहाया जाये
किसी जलचुकी चिता को फिर से सुलगाया जाए
एक अंगार से उस दिए को भी जलाया जाए
रोशन करदे जो वो शमा की जिसपे परवाने को फिर मिटाया जाए
क्यों मगर इतनी नफरत को दे हम पनपने आज
क्यों बेनूर हो गए वो रंगीन सपने आज
क्या किस्सा, क्या कहानी, है ये कौन सा राज़
क्या हुआ उन दुआओं का, कहा गयी वो आवाज
कि हर किसी के लिए जो दिल मरता था
किसी को कुछ भी कहने से जो डरता था
प्यार, मोहोब्बत की जो हर वक़्त बाते करता था
कहाँ गया वो शख्स जिसका पता ये सारी दुनिया थी
कहाँ खोया वो अक्स जिसका चेहरा ये मासूम मुनिया थी
वो तो कहता था सबका एक है खुदा
वो जो कहता था न हम कभी होंगे जुदा
फिर अचानक वो खो गया किन विरानो में
कैसे पहुंचा बिन मरे उन शमशानों में
कैसे पकड़ा ये खंजर, प्यार के दिवानो ने
गर मिल जाये आज खुदा तो मै उससे पूछुगा
कैसे आते है ऐसे सैलाब उससे पूछुंगा
ये कौन सी नस्ल है जो बन रही है आज हैवान
कहाँ है इनका मज़हब, कहाँ है आज भगवान्
"वैभव मैत्रेय"
क्या किस्सा, क्या कहानी, है ये कौन सा राज़
क्या हुआ उन दुआओं का, कहा गयी वो आवाज
कि हर किसी के लिए जो दिल मरता था
किसी को कुछ भी कहने से जो डरता था
प्यार, मोहोब्बत की जो हर वक़्त बाते करता था
कहाँ गया वो शख्स जिसका पता ये सारी दुनिया थी
कहाँ खोया वो अक्स जिसका चेहरा ये मासूम मुनिया थी
वो तो कहता था सबका एक है खुदा
वो जो कहता था न हम कभी होंगे जुदा
फिर अचानक वो खो गया किन विरानो में
कैसे पहुंचा बिन मरे उन शमशानों में
कैसे पकड़ा ये खंजर, प्यार के दिवानो ने
गर मिल जाये आज खुदा तो मै उससे पूछुगा
कैसे आते है ऐसे सैलाब उससे पूछुंगा
ये कौन सी नस्ल है जो बन रही है आज हैवान
कहाँ है इनका मज़हब, कहाँ है आज भगवान्
"वैभव मैत्रेय"
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