Tuesday, 3 January 2012

afsaana

मेरी ख़ुशी आज उन्हें मंज़ूर होगई
तेरी हर दुआ हमें कबूल होगई

कुछ शक्स हमें राह में अनजान भी मिलें
एक रात का सफ़र आज दस्तूर होगई

चाहा कहाँ हमने था रातों को जागना
तुमसे मुलाकात आज हजूर होगई


मेरी ख़ुशी आज उन्हें मंज़ूर होगई

हर लम्हा मुझे महसूस हुआ सालों की तरह
दूरी यह दरमियाँ  आज शूल होगई

एक आंसू भी आज गिरा न आँख से
हमने क्या की खता, क्या भूल होगई

मेरी ख़ुशी आज उन्हें मंज़ूर होगई

तनहा हूँ आज शाम से, यारूं की भीड़ में
एक झलक तेरी मिली और शाम हसीं होगई

कुछ आदत मुझे भी आज है खामोश रहने को
आँखों से दिल की बात कुछ संगीन होगई

मेरी ख़ुशी आज उन्हें मंज़ूर होगई

वैभव मैत्रेय

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